
खो-खो खेल क्या है? (What is the Kho Kho Game?)
भारत में खेले जाने वाली खो-खो गेम बहुत ही रोमांचक है लिए इसके बारे में कुछ ऐसे नियमों के बारे में जानते हैं जो खो-खो गेम में खेलते वक्त ध्यान रखना होतेहैं।खो-खो भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय टैग खेलों में से एक है। यह गति, फुर्ती और टीमवर्क पर आधारित एक ज़ोरदार खेल है, जिसका मज़ा गाँव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक लिया जाता है।
- मूल: खो-खो एक पारंपरिक भारतीय टैग गेम है, जिसे कबड्डी के बाद उपमहाद्वीप में सबसे अधिक पसंद किया जाता है।
- टीमें: इसे दो टीमों के बीच खेला जाता है, जिसमें प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन मैदान पर एक समय में 9 खिलाड़ी ही खेलते हैं।
- मैदान: यह एक आयताकार कोर्ट पर खेला जाता है, जिसमें एक केंद्रीय लेन (Central Lane) दो खंभों (Poles) को जोड़ती है।
- उद्देश्य: मुख्य उद्देश्य पीछा करने वाली (Chasing) टीम के लिए भागने वाली (Running/Defending) टीम के खिलाड़ियों को छूकर आउट करना और सबसे कम समय में अधिकतम अंक हासिल करना है।
खो-खो के 10 मुख्य नियम (10 Essential Rules of Kho Kho)
इसलिए मैं आपको कोको गेम के बारे में ऐसे 10 मुख्य नियम है जो खो-खो गेम के लिए बनाए गए हैं वह हमें आपको बता देताहूं। खो-खो(khokho game ) एक सख्त नियमों वाला खेल है जो इसकी रणनीति को रोमांचक बनाता है।
- टीम और पारियाँ: प्रत्येक टीम में 12 सदस्य होते हैं, जिनमें से 9 खेलते हैं। मैच में 4 पारियाँ (Turns/Quarters) होती हैं—दो पीछा करने की (Chasing) और दो बचाव की (Defending), प्रत्येक 9 मिनट की।
- चेंजर/चेज़र की दिशा (Direction of Chaser): केंद्रीय लेन पर बैठे हुए खिलाड़ी एक-दूसरे के विपरीत दिशा में मुँह करके बैठते हैं।
- सक्रिय चेज़र की गति: सक्रिय चेज़र (Active Chaser) केंद्रीय लेन को पार नहीं कर सकता। वह केवल उस दिशा में भाग सकता है जिस दिशा में उसने मुँह किया है, या फिर खंभे को छूकर दिशा बदल सकता है।
- ‘खो’ देना (Giving ‘Kho’): पीछा करने वाला खिलाड़ी अपनी जगह पर बैठे हुए साथी को पीछे से छूकर ज़ोर से “खो” बोलता है, जिससे वह साथी सक्रिय चेज़र बन जाता है।
- धावक की संख्या (Number of Runners): भागने वाली टीम के केवल तीन धावक (Runners) एक समय में मैदान में प्रवेश करते हैं। एक धावक के आउट होने पर, अगला धावक तुरंत प्रवेश नहीं करता, बल्कि जब तीन धावकों का पूरा एक बैच (Batch) आउट हो जाता है, तभी नया बैच आता है
- पॉइंट स्कोरिंग (Scoring): पीछा करने वाली टीम को प्रत्येक धावक को छूकर आउट करने पर एक अंक मिलता है।
- फाउल (Fouls): सक्रिय चेज़र द्वारा दिशा बदलना, केंद्रीय लेन को पार करना, या बिना “खो” बोले किसी को छूना फाउल (नियम उल्लंघन) माना जाता है।
- खंभे का उपयोग: दिशा बदलने या वापस मुड़ने के लिए सक्रिय चेज़र को खंभे (Pole) को छूना अनिवार्य है।
- धावक की सीमा: धावक मैदान की बाहरी सीमा से बाहर नहीं जा सकते, अन्यथा उन्हें आउट माना जाता है।
- पारी की समाप्ति: यदि पीछा करने वाली टीम समय से पहले सभी धावकों को आउट कर देती है, तो उन्हें अगले बैच को आउट करने के लिए तुरंत दूसरा “खो” देना होता है।
तो यह है वह 10 नियम जो सबसे पहले खो-खो गेम में ध्यान रखे जाते हैं। हमने यहां पर आपको सारे नियमों के बारे में नहीं बताया यह वह मुख्य 10 नियम है जो की सबसे बड़े माने जाते हैं। क्योंकि कई लोगों को अभी खो-खो गेम के बारे में पता नहीं है तो हम यह समझाना चाहते हैं की खो-खो गेम क्या होता है।
खो-खो कैसे खेलें? (How to Play Kho Kho in 10 Lines)
नियम जानने के बाद अब कहीं लोगों के मन में इसे खेलने की भी उत्साह उठ रहा होगा तो चलिए हम देख लेते हैं की किस तरीके से खो खो गेम खेला जाता है।
- खो-खो खेलने की मूल प्रक्रिया को 10 सरल पंक्तियों में समझें:
- टॉस जीतकर टीमें चेज़ (पीछा) या डिफेन्स (बचाव) चुनती हैं।
- चेज़िंग टीम के 8 खिलाड़ी केंद्रीय लेन पर विपरीत दिशाओं में मुँह करके बैठते हैं।
- एक खिलाड़ी खंभे के पास खड़ा होकर सक्रिय चेज़र (Active Chaser) बनता है।
- डिफेंडिंग टीम के 3 धावक मैदान में प्रवेश करते हैं।
- सक्रिय चेज़र धावकों को छूने की कोशिश करता है, और धावक भागकर खुद को बचाते हैं।
- चेज़र केवल उस दिशा में भाग सकता है जिस ओर उसका मुँह है।
- दिशा बदलने के लिए चेज़र को या तो खंभे को छूना होता है, या…
- …बैठे हुए साथी को पीछे से छूकर “खो” बोलना होता है, जिससे वह साथी नया सक्रिय चेज़र बन जाता है।
- धावक को छूने पर 1 पॉइंट मिलता है और वह धावक आउट हो जाता है।
- एक पारी में 9 मिनट का समय पूरा होने पर या सभी धावकों के आउट होने पर पारी समाप्त हो जाती है और टीमें अपनी भूमिकाएँ बदलती हैं।
खो-खो किस राज्य में खेला जाता है? (In Which State is Kho Kho Played?)
भारत में कौन-कौन से राज्य में यह गेम खेला जाता है लिए हम विस्तार से जानते हैं। खो-खो पूरे भारत में खेला जाता है, लेकिन इसका जन्मस्थान (Origin) और प्रमुख गढ़ महाराष्ट्र राज्य को माना जाता है।
- उत्पत्ति: यह खेल प्राचीन काल में महाराष्ट्र में ‘रथेरा’ नाम से रथों पर भी खेला जाता था।
- आधुनिक स्वरूप: 1914 के आस-पास, पूना (पुणे) के डेक्कन जिमखाना क्लब, महाराष्ट्र, ने इसके पहले नियम और विनिमय (Rules and Regulations) तैयार किए, जिसने खेल को आधुनिक रूप दिया।
आज यह खेल महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों सहित पूरे देश में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेला जाता है।
