खो-खो भारत का एक बहुत ही पुराना और लोकप्रिय खेल है। यह खेल आज भी स्कूल, कॉलेज और नेशनल लेवल तक खेला जाता है। जब भी खो-खो खेलने या मैदान बनाने की बात आती है, तो सबसे पहला सवाल यही होता है – Kho-Kho court ki lambaai aur chaudaai (dimensions) kya hoti hai?
भारत की एक प्रसिद्ध गेम जिसका नाम खो-खो गेम है लेकिन इसके बारे में ज्यादातर अपने बहुत कुछ सुना नहीं होगा क्योंकि यह गेम इतना बड़ा पॉपुलर नहीं हुआ है। हालांकि गांव की गली गली में यह खेल खेला जा रहा है लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर और ओलंपिक पर आज खेला जा रहा है लेकिन फिर भी इतना पॉप्युलर नहीं हुआ है तो इसके बारे में कई सारे सवाल आपके मन में होंगे तो लिए एक-एक करके हम इस सवालों कोसुलझाते हैं ।

Kho-Kho court ka official size (Kho-Kho court ki lambaai aur chaudaai (dimensions) kya hoti hai?)
खो-खो का मैदान आयताकार (Rectangular) होता है। इसका साइज पहले से तय होता है, ताकि हर जगह खेल एक जैसे नियमों के अनुसार खेला जा सके। जैसा कि आपने कई सारे गेम्स में देखा होगा कि कोई भी मैदान जो इंटरनेशनल लेवल पर किसी भी गेम के लिए उपलब्ध होता है उसमें खेल के नियम और कानून के हिसाब से पूरे मैदान को तैयार किया जाता है तो आज हम इस इसी टॉपिक पर आपको समझने वालेहैं ।
खो-खो कोर्ट की लंबाई 27 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर होती है।यही माप स्कूल लेवल से लेकर बड़े टूर्नामेंट तक मान्य होती है।अगर इसे आसान शब्दों में समझें तो. कोर्ट ज्यादा बड़ा नहीं होता. सीमित जगह में भी आसानी से बनाया जा सकता है. इसी वजह से यह खेल स्कूलों में बहुत लोकप्रिय है.कोर्ट की यह माप इसलिए तय की गई है ताकि खिलाड़ियों को दौड़ने, मुड़ने और दिशा बदलने में आसानी रहे और खेल तेज़ व रोमांचक बना रहे।
- कोर्ट की लंबाई: 27 मीटर
- कोर्ट की चौड़ाई: 16 मीटर
- पोल की ऊँचाई: 120–125 सेमी
- फ्री ज़ोन: 1.5 मीटर
Kho-Kho court ke andar ka layout aur important measurements
अब हम आपको ग्राउंड के बारे में डिटेल में समझते हैं उसके अंदर की साइज लेआउट किस तरीके से डिजाइन किया जाता है और क्या मायने रहते हैं इस ग्राउंड के। अब सिर्फ लंबाई और चौड़ाई जान लेना काफी नहीं होता। खो-खो कोर्ट के अंदर कुछ और हिस्से होते हैं, जिनकी जानकारी भी जरूरी है।सबसे पहले कोर्ट के दोनों सिरों पर दो पोल (खंभे) लगाए जाते हैं। ये पोल लकड़ी के होते हैं और बिल्कुल चिकने होते हैं ताकि खिलाड़ी को चोट न लगे।
पोल से जुड़ी जरूरी बातें,पोल की ऊँचाई लगभग 120 से 125 सेंटीमीटर होती है.पोल का व्यास 9 से 10 सेंटीमीटर होता है.दोनों पोल के बीच की दूरी 24 मीटर होती है.कोर्ट के बीच में एक सीधी लाइन होती है जिसे Central Lane कहा जाता है।इसकी चौड़ाई लगभग 30 सेंटीमीटर होती है। इसी लाइन पर चेज़र खिलाड़ी बैठते हैं।
Central Lane को काटती हुई कुछ आड़ी लाइनें होती हैं जिन्हें Cross Lane कहा जाता है।इनकी चौड़ाई लगभग 35 सेंटीमीटर होती है और इनका इस्तेमाल खिलाड़ियों की बैठने की जगह तय करने के लिए होता है।कोर्ट के दोनों सिरों पर पोल के पीछे जो हिस्सा बचता है, उसे Free Zone कहा जाता है।Free Zone की लंबाई लगभग 1.5 मीटर होती है। इस जगह पर खिलाड़ी बिना नियम तोड़े दिशा बदल सकते हैं।
Kho-Kho court ka sahi measurement kyun zaroori hota hai?
अगर एक ही खेल कोई सारी जगह पर कई सारे मैदान पर खेले जाने वाला है तो यहां पर यह निश्चित करना तय है कि हर जगह पर एक ही जैसा उन्हें कंपटीशन दिया जाए अगर यह एक ही साइज का मैदान नहीं रहेगा तो हमें कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर जगह पर एक ही जैसा हम खेल को उन खिलाड़ियों की ले दे रहे हैं क्योंकि अलग-अलग जगह से खेलने के लिए आए हैं और अलग-अलग जगह पर खेलने के लिए जा रहे हैं। अगर कोई शहर में मैदान छोटा रहा तो वहां पर खेल वैसा बिलकुल नहीं होगा जहां पर मैदान बड़ा होगा तो इसी तरीके से इसे ध्यान में रखते हुए मैदान को नियम के अनुसार बनाया जाता है।
खो-खो कोर्ट का सही माप होना बहुत जरूरी है, क्योंकि,गलत साइज होने पर खेल के नियम सही से लागू नहीं हो पाते.खिलाड़ियों को चोट लगने का खतरा बढ़ जाता हैमैच में विवाद की संभावना रहती है.अगर कोर्ट सही माप का होगा, तो,खिलाड़ी खुलकर खेल पाएंगे.खेल तेज़ और निष्पक्ष रहेगा.रेफरी को फैसले लेने में आसानी होगी.इसीलिए जब भी स्कूल या गांव में खो-खो का मैदान बनाया जाए, तो Kho-Kho court ki lambaai aur chaudaai (dimensions) का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
