CWG 2026 Selva Prabhu Medal: भारत के लाल सेल्वा प्रभु ने रचा इतिहास, पिता को ओलंपिक पदक का पूरा भरोसा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक जीते, जिसमें प्रवीण चित्रावेल ने रजत और 21 वर्षीय सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक हासिल किया। सेल्वा ने इसे अपने करियर की बड़ी उपलब्धि बताया, वहीं उनके पिता ने भरोसा जताया कि निरंतर सहयोग मिलने पर वह भविष्य में ओलंपिक पदक भी लाएंगे।

Commonweath Games 2026 me triple jump me medal jeetne ke baad Selva Prabhu Thirumaran aur Praveen Chithravel
इमेज : x.com ( कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराने वाले एथलीट सेल्वा प्रभु थिरुमारन और प्रवीण चित्रावेल।)

सेल्वा प्रभु का पहला सीनियर मेडल: 'संघर्ष से सफलता तक का सफर'

सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अपने दिल की बात कही। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है और तिरंगा झंडा पोडियम पर देखना उनके लिए बहुत खास पल है।

“मैं इस खुशी को शब्दों में नहीं बता सकता। यह मेरा पहला बड़ा पदक है और देश के लिए पोडियम पर खड़े होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। यहाँ तक पहुँचने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है और मेरे परिवार ने बहुत त्याग किया है। मैं यह पदक अपने माता-पिता, कोच और सभी देशवासियों को समर्पित करता हूँ जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया।”

— सेल्वा प्रभु थिरुमारन (कांस्य पदक विजेता, CWG 2026)

सेल्वा प्रभु तमिलनाडु के एक साधारण परिवार से हैं और वर्तमान में अमेरिका की कंसास यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ-साथ बड़े स्तर का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स में नए दौर की शुरुआत का संकेत दे दिया है।

प्रवीण चित्रावेल ने जीता सिल्वर, लेकिन प्रदर्शन से दिखे असंतुष्ट

राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाते हुए भारत की झोली में रजत पदक डाला। हालांकि, पदक जीतने के बावजूद प्रवीण अपने अंतिम स्कोर से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए।

उन्होंने प्रतियोगिता के बाद कहा, “2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में मैं बहुत ही मामूली अंतर से पदक से चूक गया था, इसलिए इस बार रजत पदक जीतना मेरे लिए राहत की बात है। लेकिन मेरा मुख्य ध्यान पदक से ज्यादा अपनी छलांग की दूरी पर था। मैं अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हूँ, लेकिन अब मेरा पूरा ध्यान आगामी एशियन गेम्स पर है, जहाँ मैं स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से मैदान में उतरूँगा।”

पिता बोले- 'खराब मौसम से चूका गोल्ड, ओलंपिक में जरूर लहराएगा तिरंगा'

सेल्वा प्रभु के पिता थिरुमारन ने अपने बेटे की इस सफलता पर खुशी जाहिर की, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी माना कि वे स्वर्ण पदक की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने बताया कि स्पर्धा के दौरान मौसम की परिस्थितियों के कारण सेल्वा अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ छलांग नहीं लगा सके।

थिरुमारन के अनुसार, “मुझे पूरा भरोसा था कि सेल्वा 17 मीटर से ज्यादा की दूरी तय करेगा और स्वर्ण पदक जीतेगा, लेकिन अचानक बदले मौसम ने एथलीटों के लय को थोड़ा प्रभावित किया। इसके बावजूद, पहली ही सीनियर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतना हमारे पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व का क्षण है।”

एशियन गेम्स और ओलंपिक पर टिकीं निगाहें

सेल्वा के उज्ज्वल भविष्य पर बात करते हुए उनके पिता ने केंद्र सरकार और तमिलनाडु राज्य सरकार से एथलीटों को बेहतर सुविधाएं देने की अपील की। उन्होंने कहा:

  • निरंतर ट्रेनिंग: यदि सेल्वा को अमेरिका में इसी तरह उच्च स्तरीय कोचिंग और सुविधाएं मिलती रहीं, तो वह जल्द ही 17.50 मीटर का आंकड़ा पार कर लेगा।
  • अगला लक्ष्य: आगामी एशियन गेम्स में सेल्वा का लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।
  • ओलंपिक का सपना: मात्र 21 वर्ष की आयु में इस स्तर का प्रदर्शन यह साबित करता है कि वह आने वाले ओलंपिक खेलों में भारत के लिए पदक का प्रबल दावेदार होगा।

शुभम जुयाल ने भी रचा इतिहास: ICU से CWG पोडियम तक का भावुक सफर

इसी प्रतियोगिता में पुरुषों के एफ57 शॉटपुट स्पर्धा में भारत के पैरा एथलीट शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर सभी को प्रेरित किया। अपनी जीत के बाद शुभम जुयाल ने एक भावुक वाकया साझा किया।

उन्होंने बताया कि ठीक चार साल पहले, 1 अगस्त को वह अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे। उस वक्त उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे मैदान पर वापसी कर देश के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतेंगे। शुभम जुयाल ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय भारतीय सेना, अपने परिवार और अपने कोचों के निरंतर समर्थन को दिया।