भारत ने 10वीं Indo-Nepal Kabaddi Championship जीतकर कबड्डी में अपनी अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठता एक बार फिर साबित कर दी है।
फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 35–28 से हराकर Gold Medal अपने नाम किया।
इस ऐतिहासिक जीत के सबसे मजबूत स्तंभ रहे राजस्थान के सिरोही जिले के भारजा गांव के खिलाड़ी दुर्गेश छीपा, जिनके दमदार प्रदर्शन ने भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई।
यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत से निकले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की सफलता की कहानी है।

10वीं इंडो-नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप: क्या हुआ फाइनल में?
भारत ने पूरे मैच में रणनीति, फिटनेस और संयम के साथ खेलते हुए नेपाल को पीछे छोड़ा।
कबड्डी के इस महा शांगराम में भारताने बड़ी जित हासिल की 10th Indo-Nepal Kabaddi Championship में भारत ने नेपाल के साथ फ़ाइनल खेला था। और इस खेल में भारत स्फूर्ति के साथ खेले , अपनी रणनीति के चलते Final Score भारत का 35 – नेपाल का 28 रहा। और इसी केचलते भारत ने जित हासिल की। और भारत चैंपियन बना।
भारत की टीम ने defence और raid दोनों में संतुलन बनाए रखा, जिससे नेपाल को वापसी का मौका नहीं मिला।
दुर्गेश छीपा कौन हैं? (Exact Definition – Snippet Ready)
दुर्गेश छीपा राजस्थान के सिरोही जिले के भारजा गांव के अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 10वीं इंडो-नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया और भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
फाइनल मैच में दुर्गेश छीपा का योगदान क्यों निर्णायक रहा?
दुर्गेश का प्रदर्शन सिर्फ points तक सीमित नहीं था, बल्कि match control में दिखा।
खेल में उनकी उनकी भूमिका कुछ आई रही , वह Crucial moments में strong defence बने रहे। उनकी फिटनेश और माइंड सेट ने उनका साथ दिया Pressure situation में भी वह smart decision-making करते रहे। उन्होंने बेहतरीन डिसीजन्स दिए। यहाँ अमरि पूरी टाइम ने ही एक बेहतरीन प्रार्शन किया पूरी टीम Team coordination और tactical discipline के साथ जुडी रही। पूरी टाइम ने कोई भी मौका नेपाल की टटीम को नहीं दिया , उन्होंने Nepal के momentum को break किया। इसी वजह से फिर नेपाल फिर से खड़ा ही हो पाया। यही कारण रहा कि coaching staff और teammates ने उनके खेल को match-turning performance मा। और यह शब् हुआ दुर्गेश के योगदान से।
संघर्ष से सफलता तक: दुर्गेश छीपा की प्रेरणादायक यात्रा
दुर्गेश छीपा का मुकाम आसान बिलकुल नहीं था। उनके पिताका नाम के अरविंद कुमार छीपा हैं।
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन लक्ष्य कभी कमजोर नहीं पड़ा। इसी लिए वह आज शफल ताकि सिसडीपर चढ़ रहे है। उनका परिवार एक सीमित पारिवार था संसाधन ही बेहत सिमित थे। सिरभी वह अपने लाक्षा के लिए बने रहे ,डेट रहे। गांव में अभ्यास की भी बेहत कम सुविधाएं मिलती थी , लड़का होने के कारण पैसे कामनेका आर्थिक दबाव उनपर बना रहता था। इसके बावजूद दुर्गेश ने नियमित अभ्यास किया और कभी अपना अभ्यास नहीं छोड़ा। शुरुआत में हर local tournament को अपना अवसर माना। वह से लेकर National selection से International level तक सफर उन्होंने तय किया। उनकी जर्नी यह बताती है कि संसाधन नहीं, संकल्प सबसे बड़ा हथियार होता है।
यह भी पढ़े:बिजनौर की कबड्डी खिलाड़ी भूमिका का हुआ जोरदार स्वागत, जूनियर नेशनल में किया यूपी का प्रतिनिधित्व।
मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति का संगम
दुर्गेश की सफलता किसी एक टूर्नामेंट का परिणाम नहीं है गवसे ही वह बचपन से कबड्डी को लक्ष्य बना कर खेल रहे थे। हर लोकल मच को भी वह बड़े शान से खेल ते थे। वह Daily discipline और fitness पर फोकस करते थे। गांव में हर मैच को सीखने का मौका माना, इंडो-नेपाल चैंपियनशिप में उनकी फुर्ती, तकनीक और रणनीतिक समझ ने भारत को बढ़त दिलाई।
इस जीत का भारत और कबड्डी के लिए क्या मतलब है?
यह जीत कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है. भारत की international kabaddi dominance मजबूत हुई,नए और ग्रामीण खिलाड़ियों को पहचान मिली,Indo-Nepal sports relations को मजबूती मिलीं,युवा खिलाड़ियों के लिए motivation बढ़ा,यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि Indian Kabaddi ecosystem की जीत है।
सिरोही और भारजा गांव में खुशी की लहर क्यों है?
भारत की जीत इस बाद उनके गांव में ,पूरे भारजा गांव में जश्न का माहौल बन गया था। और वह के युवाओं में खेल के प्रति नया जोश भर गया है। उनके परिवार और ग्रामीणों उनकी वजह से गर्व महसूस किया। स्थानीय प्रतिनिधियों और खेल संगठनों ने उन्हें बधाई दी,दुर्गेश अब सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि role model बन चुके हैं उन युवाओके जो कबड्डी में अपना इतिहास बना नचाहते है ।
यह भी पढे : kho-kho ground ka size kitna hota hair:Kho-Kho court ki lambaai aur chaudaai (dimensions) kya hoti hai?
FAQs
इंडो-नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप 2026 कौन जीता?
भारत ने 10वीं इंडो-नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
दुर्गेश छीपा किस जिले से हैं?
दुर्गेश छीपा राजस्थान के सिरोही जिले के भारजा गांव से हैं।
फाइनल मैच का स्कोर क्या था?
भारत 35 – नेपाल 28।
दुर्गेश छीपा क्यों चर्चा में हैं?
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।
यह जीत क्यों खास मानी जा रही है?
यह जीत भारतीय कबड्डी की ताकत और ग्रामीण प्रतिभा की पहचान को दर्शाती है।






