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Piyush Kumar Singh की डबल सेंचुरी से बिहार जीत के बेहद करीब | Ranji Trophy Plate Group

पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में बिहार ने रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मैच में मणिपुर को धूल चटा दी। Piyush Kumar Singh की नाबाद 216 रन की पारी ने बिहार को ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंचा दिया। चौथे दिन 763 रन की अजेय लीड बनाई।

Piyush Kumar Singh double century

Piyush Kumar Singh की नाबाद डबल सेंचुरी से बिहार की ऐतिहासिक जीत के करीब

पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप मुकाबले में पियूष कुमार सिंह ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया। उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद डबल सेंचुरी लगाकर बिहार को विशाल बढ़त दिला दी। उनकी यह पारी धैर्य, तकनीक और क्लास का शानदार उदाहरण रही।

पियूष सिंह का यह प्रदर्शन सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि बिहार क्रिकेट में अब मैच जिताने वाले बल्लेबाज़ सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक क्रीज़ पर टिके रहना और लगातार रन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन पियूष ने इसे बेहद सरल बना दिया।

इस डबल सेंचुरी की वजह से बिहार ने मणिपुर पर ऐसा दबाव बनाया कि मैच लगभग एकतरफा हो गया। क्रिकेट फैंस के लिए यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी और पियूष सिंह का नाम बिहार क्रिकेट के नए सितारे के रूप में उभरकर सामने आया।

जीत की दहलीज पर: मैच के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक बिहार की स्थिति इतनी मजबूत हो गई है कि अब मणिपुर का हारना लगभग तय है। पीयूष ने क्रीज पर खूंटा गाड़कर बल्लेबाजी की और एक छोर संभाले रखा, जिससे मणिपुर की टीम पूरी तरह बेबस नजर आई। इस दोहरे शतक की बदौलत बिहार अब इस ऐतिहासिक जीत का बस औपचारिक ऐलान होने का इंतजार कर रहा है।

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Piyush Kumar Singh double century

Ranji Trophy Plate Group मैच में बिहार ने मणिपुर पर बनाई 763 रनों की विशाल बढ़त

रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप में बिहार का दबदबा देखने लायक था। पहला भाग: पहली इनिंग्स में 522 रन बनाए, मणिपुर 264 पर ऑलआउट, 258 रन का लीड मिल गया जो मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। दूसरा भाग: दूसरी इनिंग्स में 505/5 बनाकर कुल 763 रन आगे, ये लीड रणजी हिस्ट्री में सबसे बड़ी लीड्स में शुमार हो गई। तीसरा भाग: बिहार प्लेट ग्रुप में टॉप पर पहुंचने के करीब, अगले राउंड के लिए पॉइंट्स टेबल में मजबूत पोजीशन बन गई।

इतिहास रचने की तैयारी: अगर मणिपुर आखिरी दिन 764 रनों का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती (जो कि नामुमकिन है), तो बिहार की यह जीत रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो जाएगी। बिहार के बल्लेबाजों ने जिस तरह से क्रीज का इस्तेमाल किया, उससे मणिपुर के कप्तान के पास फील्डिंग सजाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह बढ़त बिहार की मेहनत और सटीक प्लानिंग का नतीजा है

इस मुकाबले में चौथे दिन का खेल खत्म होने तक बिहार ने मणिपुर पर 763 रनों की भारी बढ़त बना ली। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इतनी बड़ी लीड का पीछा करना लगभग नामुमकिन माना जाता है। बिहार ने मैच को पूरी तरह अपने कंट्रोल में ले लिया है।

अगर बिहार आखिरी दिन बल्लेबाज़ी नहीं भी करता है, तब भी मणिपुर को जीत के लिए 764 रन बनाने होंगे, जो एक असंभव सा लक्ष्य है। ऐसे हालात में मणिपुर की टीम मानसिक दबाव में साफ नजर आई।

यह बढ़त यह भी तय करती है कि अगर मैच ड्रॉ होता है, तब भी पहली पारी की बढ़त के आधार पर बिहार को विजेता घोषित किया जाएगा। यानी बिहार की जीत अब सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है।

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मोइनुल हक स्टेडियम, पटना में बिहार के बल्लेबाज़ों का ज़बरदस्त दबदबा

घरेलू मैदान का फायदा- मोइनुल हक स्टेडियम, पटना बिहार क्रिकेट टीम का घरेलू मैदान है और यहाँ खेलने का उन्हें पूरा फायदा मिला। इस मैदान की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल है, जहाँ बाउंस समान रहता है और गेंदबाजों को मदद मिलने में समय लगता है। बिहार के बल्लेबाजों ने इस स्थिति को भरपूर तरीके से भुनाया और दोनों पारियों में बड़े स्कोर खड़े किए।

बल्लेबाजी इकाई का प्रदर्शन- इस मैच में बिहार की पूरी बल्लेबाजी इकाई ने शानदार प्रदर्शन किया। सिर्फ पीयूष सिंह ही नहीं, बल्कि बिपिन सौरभ, शकीबुल गनी, खालिद और प्रताप सहित सभी बल्लेबाजों ने अपना-अपना योगदान दिया। टीम में सभी बल्लेबाजों का फॉर्म में होना एक बड़ी उपलब्धि है और यह कोचिंग स्टाफ की कामयाबी को दर्शाता है।

मोइनुल हक स्टेडियम, पटना की पिच इस मुकाबले में बल्लेबाज़ों के लिए अनुकूल नजर आई, और बिहार के बल्लेबाज़ों ने इसका पूरा फायदा उठाया। शुरुआत से ही बिहार की रणनीति साफ थी—लंबी पारी खेलकर मणिपुर को थकाना।

स्टेडियम का इतिहास- मोइनुल हक स्टेडियम का भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक खास स्थान है। यहाँ पहले भी कई ऐतिहासिक पारियाँ खेली गई हैं। इस मैच में बिहार के बल्लेबाजों ने इस स्टेडियम के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। स्थानीय प्रशंसकों के लिए यह मैच लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

पहली पारी में Bipin Saurabh और Shakibul Ghani की शतकीय पारियों ने रखी मजबूत नींव

बिहार की पहली पारी की बात करें तो टीम ने 522 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस पारी की सबसे बड़ी खासियत Bipin Saurabh का शानदार 143 रन का योगदान रहा, जिसने टीम को मजबूती दी।

इसके अलावा Shakibul Ghani ने भी बेहतरीन शतक जमाया और विपक्षी टीम के गेंदबाज़ों को कोई मौका नहीं दिया। दोनों बल्लेबाज़ों की पारियों ने मणिपुर को बैकफुट पर धकेल दिया।

Suraj Kashyap की नाबाद 83 रनों की पारी ने स्कोर को और बड़ा बना दिया। पहली पारी की यह बढ़त ही आगे चलकर बिहार की जीत की सबसे बड़ी वजह बनी।

दूसरी पारी में Piyush Singh और Pratap की 162 रनों की साझेदारी ने मैच किया एकतरफा

जब दूसरी पारी में पीयूष सिंह और प्रताप ने 162 रनों की साझेदारी की, तो मैच पूरी तरह से बिहार के पक्ष में चला गया। यह साझेदारी न केवल रनों के मामले में, बल्कि समय के हिसाब से भी बहुत महत्वपूर्ण थी। दोनों बल्लेबाजों ने लंबे समय तक क्रीज पर डटे रहकर मणिपुर के खिलाड़ियों की उम्मीदें खत्म कर दीं।

प्रताप ने इस साझेदारी में 90 रनों का अहम योगदान दिया। उन्होंने पीयूष सिंह का बखूबी साथ दिया और दबाव को अपने ऊपर नहीं आने दिया। प्रताप की इस पारी से साबित होता है कि बिहार टीम में बल्लेबाजी की गहराई है और एक खिलाड़ी आउट होता है तो दूसरा उसकी जगह लेने के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी पूरे मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इससे पहले भी बिहार मजबूत स्थिति में था, लेकिन इस साझेदारी ने मणिपुर की किसी भी तरह की वापसी की संभावना को पूरी तरह से खत्म कर दिया। यह साझेदारी दर्शाती है कि बिहार के बल्लेबाज न केवल रन बना सकते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर समय भी खर्च कर सकते हैं।

मणिपुर के सात गेंदबाज़ भी नहीं रोक पाए बिहार की रन मशीन

मणिपुर ने इस मैच में कुल सात गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया, लेकिन कोई भी बिहार के बल्लेबाज़ों को लंबे समय तक परेशान नहीं कर सका। हर गेंदबाज़ को रन पड़े और विकेट निकालना मुश्किल साबित हुआ।

हालांकि Jotin ने तीन विकेट लेकर थोड़ा संघर्ष दिखाया, जबकि Kishan और Janson को एक-एक विकेट मिला। लेकिन यह प्रयास बिहार की मजबूत बल्लेबाज़ी के सामने काफी नहीं थे।

Bipin Saurabh ने दूसरी पारी में भी तेज़ 52 रन बनाकर यह साबित किया कि बिहार की बल्लेबाज़ी पूरी तरह संतुलित और खतरनाक है।

Ranji Trophy में बिहार को मिला नया क्रिकेटिंग हीरो

पीयूष का उदय: इस मैच ने बिहार क्रिकेट को एक नया सितारा दिया है—पीयूष कुमार सिंह। उनके दोहरे शतक ने उन्हें रातों-रात चर्चा में ला दिया है। बिहार जैसे राज्य में जहाँ क्रिकेट की प्रतिभाएं अब धीरे-धीरे मुख्यधारा में आ रही हैं, पीयूष का यह प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।

भविष्य की उम्मीद: पीयूष की बल्लेबाजी की तकनीक और क्रीज पर बिताया गया समय उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। वे न केवल रन बना रहे हैं, बल्कि लंबी पारी खेलने की क्षमता भी रखते हैं, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट की सबसे बड़ी जरूरत है। बिहार को अब एक ऐसा बल्लेबाज मिल गया है जिस पर आने वाले मैचों में भरोसा किया जा सकता है।

बिहार क्रिकेट का नया चेहरा: रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में बिहार की परफॉर्मेंस में जो सुधार दिख रहा है, उसके पीछे पीयूष जैसे खिलाड़ियों का हाथ है। पटना के इस ‘लोकल हीरो’ ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। अब फैंस को उम्मीद है कि पीयूष जल्द ही भारतीय क्रिकेट के बड़े मंचों पर भी अपना जलवा दिखाएंगे।

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