भारतीय कोर्ट पर जब भी डबल्स (Doubles) और मिक्स्ड कैटेगरी की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले जुबान पर आता है—Ashwini Ponnappa। अपनी चीते जैसी फुर्ती और बेहद आक्रामक खेल के लिए मशहूर इस खिलाड़ी ने देश में डबल्स बैडमिंटन को एक नया मुकाम दिया है।
एक ऐसे दौर में जब भारतीय मीडिया और फैंस का पूरा ध्यान सिर्फ सिंगल्स प्लेयर्स पर हुआ करता था, तब इस स्टार शटलर ने अपनी कड़क हिट्स और कमाल की पार्टनरशिप के दम पर पूरी दुनिया में तिरंगा लहराया।आज इस लेख में हम उनके जीवन पर्सनल लाइफ, खेल के उतार-चढ़ाव और उनकी ऐतिहासिक जीतों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

देश की यह स्टार खिलाड़ी कौन हैं और उनका जन्म कहाँ हुआ था?
यह भारत की एक शीर्ष स्तर की अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी है, जो मुख्य रूप से महिला और मिश्रित युगल प्रारूप मेखेलती है। उनका जन्म 18 सितंबर 1989 को बैंगलोर , कर्नाटक में हुआ था। बेंगलुरु की यह खिलाड़ी एक खेल पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती है। उनके पिता, एम. ए. पोनप्पा, एक राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं। यही कारण था कि खेल के प्रति उनका आकर्षण बचपन से ही था।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट फ्रांसिस जेवियर गर्ल्स हाई स्कूल से पूरी की और बाद में आगे की कॉलेज की शिक्षा के लिए सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्स को चुना। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही रैकेट पकड़ लिया था और साल 2001 में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय सब-जूनियर खिताब जीता, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि वह आने वाले समय की बड़ी स्टार बनने वाली हैं।
इनके पति कौन हैं?
इंटरनेट पर लोग इस स्टार एथलीट की निजी जिंदगी के बारे में बहुत कुछ ढूढते रहते है। उनके पति का नाम करन मेदप्पा है। करन एक कामयाब व्यवसायी और मॉडल हैं।
इन दोनों ने कुछ समय तक एक दूसरे को डेट करने के बाद 24 दिसंबर 2017 को कर्नाटक के कूर्ग में एक पारंपरिक कोडावा रीति-रिवाज से शादी की थी। करन अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी का साथ देते हुए दिखाई देते हैं और खेल के व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी दोनों के बीच की नजदीकी फैंस को बहुत पसंद आती है।
करियर के बड़े रिकॉर्ड्स क्या हैं?
भारतीय शटलर का सफर वास्तव में अद्भुत रहा है जिसमें कई महत्वपूर्ण आंकड़े और मेडल शामिल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके कुछ मुख्य उपलब्धियों और हाइलाइट्स को नीचे देखा जा सकता है :
1. कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन
उनका नाम कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। उन्होंने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण मेडल जीते हैं :
- 2010 में, दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में, ज्वाला गुट्टा के साथ मिलकर महिला युगल में स्वर्ण मेडल जीता और मिश्रित टीम इवेंट में रजत मेडल हासिल किया।
- 2014 में, ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में, इसी श्रेणी में देश को रजत मेडल दिलाया।
- 2018 में, गोल्ड कोस्ट में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में, मिश्रित टीम इवेट में ऐतिहासिक स्वर्ण मेडल और महिला युगल में कांस्य मेडल जीता।
- 2022 में, बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में, मिश्रित टीम इवेंट में भारत को रजत मेडल दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. वर्ल्ड चैंपियनशिप में रचा इतिहास
साल 2011 में लंदन में आयोजित बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन विश्व चैंपियनशिप में इस जोड़ी ने कांस्य पदक जीता था। यह भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना थी, क्योंकि इससे पहले किसी भी भारतीय जोड़ी ने विश्व चैंपियनशिप के डबल्स में कोई पदक नहीं जीता था।
इन्हें 'क्वीन ऑफ स्मैश' क्यों कहा जाता है?
बैडमिंटन की दुनिया में हर खिलाड़ी की अपनी एक विशेषता होती है। इस खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत उनका बहुत ही जबरदस्त स्मैश है। डबल्स गेम बहुत तेजी से चलता है, जहाँ बहुत ही जल्दी फैसले लेने पड़ते हैं।
यह खिलाड़ी आमतौर पर कोर्ट के पीछे की तरफ से खेलना पसंद करती है जहाँ से वह बहुत ही सटीक और तेज प्रहार करती हैं। उनके शॉट्स की गति इतनी ज्यादा होती है कि दुनिया के सबसे अच्छे रक्षक भी उसे रोकने में असमर्थ रहते हैं। उनके इसी आक्रामक खेल के कारण प्रशंसक उन्हे ‘स्मैश की रानी’ या भारत की सबसे खतरनाक पीछे की तरफ से खेलने वाली खिलाड़ी कहते हैं।
इनके सबसे सफल जोड़ीदार कौन रहे हैं?
इस खिलाड़ी के करियर को आकार देने में कोर्टपर उनके साथी खिलाड़ियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके करियर में दो सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियाँ रही हैं:
* ज्वाला गुट्टा के साथ साझेदारी: भारतीय खेल इतिहास की सबसे सफल और प्रतिष्ठित जोड़ियो में से एक। इन दोनों का साथ बहुत अच्छा था – ज्वाला नेट के पास के क्षेत्र को संभालती थीं और यह खिलाड़ी कोर्ट के पीछे से खेल को नियंत्रित करती थीं।
* तनीषा क्रास्टो के साथ नई शुरुआत : अपने करियर के अगले चरण मे उन्होंने युवा खिलाड़ी तनीषा क्रास्टो के साथ मिलकर काम किया। इस वरिष्ठ-जूनियर जोड़ी ने शानदार तालमेल दिखाया और कई बीडब्ल्यूएफ खिताब जीते।
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इनकी कमाई और नेट वर्थ कितनी है?
मीडिया रिपोर्ट्स और खेल से जुड़े स्रोतों के अनुसार,इस अनुभवी खिलाड़ी की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 1 से 3 मिलियन डॉलर के बीच है, जो लगभग 8 से 25 करोड़ रुपये होती है।
उनकी कमाई का मुख्य स्रोत अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में मिलने वाली पुरस्कार राशि, सरकार से मिलने वाला समर्थन, और ब्रांड विज्ञापन हैं। इसके अलावा, वह खेल से जुड़ी अन्य पहलों और विज्ञापनों से भी अच्छी कमाई करती हैं।





